John Elia Jo Apne Urdu ke anuthe aur Baki Shayari ke liye prasiddh hai

ये *जॉन एलिया* हैं। पूरा नाम: सैयद जॉन असग़र एलिया *क्यों मशहूर हैं*: उर्दू के सबसे अनूठे और बाग़ी शायरों में से एक। 1931 में अमरोहा में पैदा हुए, बाद में पाकिस्तान चले गए। दुबले-पतले, लंबे बाल, और हमेशा उदास-सी आँखें इनकी पहचान थी। *शायरी का अंदाज़*: मोहब्बत, दर्द, अकेलापन और वजूद पर सवाल। इनकी ग़ज़लें सीधी दिल में उतरती हैं। *मशहूर शेर*: _मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस, ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं_ 2002 में कराची में इनका इंतकाल हुआ, पर आज भी नौजवानों में सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाले शायर हैं।
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तन्हाई और खुद से जंग

​जौन की शायरी में 'मैं' और 'खुद से नफ़रत' का एक अजीब मेल मिलता है।

  • "अब नहीं कोई बात भी अपनी, अब तो बस ज़ात भी नहीं अपनी।"
  • "मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस, खुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं।"
  • "अपने अंदर हँसता हूँ मैं, और बहुत ही कम हँसता हूँ।"

​💔 मुहब्बत और नाकामी

​उनकी मुहब्बत में वफ़ा से ज़्यादा शिकवा और एक तरह की बेरुखी नज़र आती है।

  • "शर्म, दहशत, झिझक, लारा-लपप्ती से काम क्यों नहीं लेती, आप, वह, जी, मगर... ये सब क्या है, तुम मेरा नाम क्यों नहीं लेती?"
  • "जो गुज़ारी न जा सकी हमसे, हमने वो ज़िंदगी गुज़ारी है।"
  • "नया एक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम, बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम।"

​🥀 दुनिया से बेज़ारी (उदासी)

​जौन का अंदाज़ कभी-कभी बहुत कड़वा और हकीकत के करीब होता है।

  • "बहुत नज़दीक आती जा रही हो, बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या?"
  • "क्या सितम है कि अब तेरी सूरत, गौर करने पर याद आती है।"
  • "मुझको अब और याद मत आना, मैं तुम्हें भूलने की कोशिश में हूँ।"

​🖋️ जौन का अनूठा 'अंदाज़-ए-बयां'

​जौन सिर्फ दुखी नहीं थे, वो विद्रोही (Rebel) भी थे। उनकी शायरी में एक झल्लाहट है:

​"ज़िन्दगी एक फन (कला) है लम्हों को,

अपने अंदाज़ से गँवाने का।"


​जौन एलिया की शायरी पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे कोई घाव पर नमक छिड़क रहा हो, लेकिन वो नमक भी मरहम जैसा महसूस होता है।